Friday, 22 September 2017

जॉइंट पैन या जोड़ो का दर्द आजकल एक आम समस्या बन गया है। एक समय था जब एक उम्र के बाद जॉइंट पैन हुआ करता था और इसको बढ़ती उम्र की निशानी माना जाता था लेकिन आजकल की अव्यवस्थित जीवनशैली और अनुचित खान पान के कारण हर किसी के जोड़ो में दर्द की समस्या होने लगी है। शरीर के ऐसे हिस्से जहां दो हड्डियां मिलती हों, जोड़ कहलाते हैं, जैसे घुटने (knee), कंधे (shoulder), कोहनी (elbow) आदि। जोड़ शरीर का अहम हिस्सा होते हैं जिनके कारण उठना-बैठना, चलना, शरीर को मोड़ना आदि संभव हो पाता है।
 ऐसे मे जोड़ों में दर्द होने पर पूरे शरीर का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। यह दर्द पैरों के घुटनों, गुहनियों, गदर्न, बाजुओं और कूल्‍हों में हो सकता है। एक्सरसाइज के अलावा पौष्टिक और हेल्‍दी खानपान आपके जोड़ के दर्द को कम कर के तुरंत आराम दिलाने में मदद करेगा।आइये जोड़ों के दर्द के घरेलू उपचार के बारे में जानते हैं:

मालिश करें (Massage)

शरीर के किसी भी दर्द में मालिश से बेहद आराम मिलता है, तो यही बात जोड़ों के दर्द में भी लागू होती है। यदि आपको अक्सर जोड़ों में दर्द बना रहता है तो नारियल, जैतून, सरसों या लहसुन के तेल से प्रभावित हिस्से की मालिश करें। हल्के हाथों से दबाव देते हुए दर्द वाले हिस्से को मलें। ऐसा करने से दर्द से राहत मिलेगी।

गर्म और ठंडी सिकाई (Cold and Hot Compress)

जोड़ों के दर्द से निजात के लिए गर्म और ठंडी सिकाई करने से भी बहुत आराम मिलता है। गर्म सिकाई करने से रक्त संचार बेहतर होता है वहीं ठंडी सिकाई से सूजन और चुभन कम होती है। गर्म सिकाई के लिए गर्म पानी की बोतल को टॉवल में लपेट कर जोड़ों की सिकाई करें। और ठंडी सिकाई करने के लिए बर्फ के टुकड़ों को टॉवल में लपेटकर, उस टॉवल से सिकाई करें। सिकाई करते वक्त कम से कम दो से तीन मिनट तक जोड़ों की लगातार सिकाई होनी चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में दोहराएं।

लहसुन (Garlic)

यदि जोड़ों में दर्द है तो लहसुन का इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके औषधीय गुण जोड़ों के दर्द, सूजन और जलन को ठीक करते हैं। लहसुन की दो कली हर सुबह खाली पेट पानी के साथ खाएं। खाना बनाने वाले किसी भी तेल में लहसुन की कुछ कलियां डाल कर भून लें। इस तेल को गुनगुना होने तक ठंडा करें और प्रभावित हिस्से की मालिश करें।

हल्दी (Turmeric)

हल्दी के स्वास्थ्य और सौन्दर्य को बनाए रखने वाले गुण किसी से छिपे नहीं है लेकिन अच्छी बात यह भी है कि यह जोड़ों के दर्द में भी उतनी ही प्रभावी है। हल्दी रक्त संचार तेज करके जोड़ों के दर्द से आराम देती है और जोड़ों की अकड़न को भी कम करती है।

अदरक (Ginger)

जोड़ों के दर्द के इलाज के लिए अदरक भी बेहतरीन प्रभाव दिखाता है। यह हर्ब भी गुणों से भरपूर है जो कि रक्त संचार को तेज करती है जिससे जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है। एक दिन में लगभग तीन कप अदरक की चाय पिएं। अदरक की चाय बनाने के लिए पानी में अदरक उबालें और ठंडा करके इसमें शहद मिलाएं। और इसे पिएं। प्रभावित हिस्से की अदरक के तेल से मसाज भी की जा सकती है।

बबूल/कीकर और मेथी पाउडर का सेवन

 बबूल या कीकर की फली को सुखाकर उसका पाउडर बना लें, इसमें इतनी ही मात्रा में मेथी दाने का पाउडर बनाकर मिला लें। अब दोनों चीज़ों को आपस में अच्छी तरह  मिला लें और इस पाउडर को सुबह- शाम लगभग 1 चम्मच गुनगुने पानी से सेवन करें।

बथुआ के ताजा पत्‍तों का रस (The juice of fresh leaves Bathua)

बथुआ के ताजा पत्‍तों का रस हर दिन 15 ग्राम पिएं। इसमें स्‍वाद के लिए कुछ भी न मिलाएं। खाली पेट पीने से ज्‍यादा लाभ होता है। तीन महीने पीने से दर्द से हमेशा के लिए निजात मिल जाती है।

एप्पल साइडर विनेगर (Apple Cider Vinegar)

एप्पल साइडर विनेगर भी जोड़ों के दर्द से राहत देने में बहुत अच्छा असर दिखाता है। यह जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत देता है। एप्पल साइडर विनेगरवमे किसी कपड़े को भिगोकर दर्द वाले स्थान पर लपेंटें और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। दिन में दो बार इस विधि को करें। गुनगुने पानी में 2 कप एप्पल साइडर विनेगर डालकर नहाया भी जा सकता है।

आलू का रस (Potato juice)

जोड़ों में दर्द होने पर हर दिन खाना खाने से पहले से दो आलूओं का रस निकाल लें और पिएं। हर दिन कम से कम शरीर में 100 मिली. रस पीने से आराम मिलेगा।

वजन को नियंत्रित रखें (Maintain your weight)

यदि आपका वजन नियंत्रण में रहेगा तो आपके जोड़ भी स्वास्थ्य रहेंगे। शरीर का ज्यादा वजन घुटनों और कमर पर अधिक दबाव डालता है, जिससे कार्टिलेज (cartilage) के टूटने का डर रहता है। ऐसे में वजन को नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी है।

व्यायाम (Exercise)

जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए व्यायाम को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। तैराकी (swimming) भी जोड़ों के दर्द से राहत के लिए अच्छा व्यायाम होती है।

दूध पीएं (Drink milk)

जोड़ों को मजबूत रखने के लिए दूध जरूर पीएं। दूध से हड्डियों को कैल्शियम और विटामिन डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। यदि दूध पसंद न हो तो दूध से बने अन्य खाद्य पदार्थ जैसे पनीर, दही आदि भी खाए जा सकते हैं।

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Friday, 15 September 2017

गुर्दे की पथरी, या नेफ्रोलिथियासिस एक कठिन, क्रिस्टलीय खनिज पदार्थ है जो गुर्दे या मूत्र पथ मे होती है। गुर्दा की पथरी आम तौर पर गुर्दे में होती है और मूत्र प्रवाह के साथ शरीर से बाहर निकलती है। एक छोटा पत्थर, किसी भी लक्षण के बिना पार हो सकता है। लेकिन अगर पत्थर 5 मिलीमीटर से अधिक हो जाता है, तो यह मूत्रमार्ग मे रुकावट पैदा कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप पीठ के निचले हिस्से या पेट में गंभीर दर्द हो सकता है।
विभिन्न पदार्थों से बने, चार प्रकार के गुर्दा पत्थर होते हैं - कैल्शियम, यूरिक एसिड, स्ट्रुविइट, सिस्टिन हैं। विभिन्न कारक इन पत्थरों के विकास के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। आनुवांशिकी और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन के कारण अधिकांश पत्थियां बनती हैं। जोखिम कारक में मूत्र में कैल्शियम का उच्च स्तर, मोटापा, कुछ खाद्य पदार्थ, कुछ दवाएं, कैल्शियम की खुराक, अतिपरजीविता, गाउट और पर्याप्त तरल पदार्थ न मिलना शामिल हैं।

गुर्दे की पथरी के लक्षण

पत्थर के आकार के आधार पर, मूत्र पथ के माध्यम से पत्थर का आंदोलन, अचानक गंभीर दर्द दे सकता है। पीठ के निचले हिस्से, पेट, और पक्ष अक्सर दर्द और ऐंठन की जगह होते हैं। गुर्दा की पथरी के अन्य लक्षणों में मूत्र में रक्त (लाल, गुलाबी, या भूरे रंग के मूत्र), उल्टी, मतली, बदबूदार पेशाब, ठंड लगना, बुखार, पेशाब करने की अक्सर आवश्यकता, छोटी मात्रा में पेशाब करना शामिल हैं।

गुर्दे की पथरी का निदान

गुर्दा की पथरी के निदान के लिए एक पूरा स्वास्थ्य इतिहास मूल्यांकन और एक शारीरिक परीक्षा की आवश्यकता है। अन्य परीक्षणों में शामिल हैं:
- कैल्शियम, फास्फोरस, यूरिक एसिड, और इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए रक्त परीक्षण
- क्रिस्टल, बैक्टीरिया, रक्त, और सफेद कोशिकाओं की जांच करने के लिए यूरीनालिसिस।
- पेट एक्सरे
- अंतःशिरा पियलोग्राम
- पेट का सी-टी स्कैन

गुर्दे की पथरी के लिए उपचार

पत्थर के प्रकार और कारण के आधार पर, गुर्दे की पथरी के लिए उपचार भिन्न होता है।

छोटे पत्थरों के लिए:

छोटे गुर्दा की पत्थरों में से अधिकांश को आक्रामक उपचार की आवश्यकता नहीं होगी। आप इस तरह से एक छोटे से पत्थर पारित करने में सक्षम हो सकते हैं:
- एक दिन में छह से आठ गिलास पानी पीने से
- एक छोटा पत्थर पास होने से कुछ परेशानी हो सकती है, इसलिए हल्के दर्द को दूर करने के लिए, आपका डॉक्टर दर्द निवारक जैसे कि इबुप्रोफेन की सिफारिश कर सकता है।
- आपका डॉक्टर आपको एक अल्फा अवरोधक भी लिख सकता है, जो कि आपके मूत्रवाहिनी में मांसपेशियों को आराम देता है, जिससे कि आप गुर्दा की पथरी को और अधिक तेज़ी से और कम दर्द के साथ पारित करते हैं।

बड़े पत्थरों के लिए:

गुर्दे की पथरी जो बहुत बड़ी है, उन्हें अधिक व्यापक उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

1. औषधि-प्रयोग:

दर्द से राहत पाने में मादक दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। संक्रमण की उपस्थिति होने पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज की आवश्यकता है। अन्य दवाओं में शामिल हैं:
- यूरिक एसिड पत्थरों के लिए एलोप्यूरिनॉल
- मूत्रल
- सोडियम बाइकार्बोनेट या सोडियम साइट्रेट
- फास्फोरस समाधान

2. अश्मरीभंजक:

एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिपी बड़े पत्थरों को तोड़ने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। यह प्रक्रिया थोड़ी दर्दनाक हो सकती है और हल्के संज्ञाहरण की आवश्यकता हो सकती है।

3. टनल सर्जरी (पर्कूटनियस नैफ्रोलीथोटोमी):

पत्थरों को आपकी पीठ में एक छोटी सी चीरा के माध्यम से हटा दिया जाता है और ये तब आवश्यक हो सकता है जब:
- पत्थर बाधा और संक्रमण का कारण बनता है या गुर्दों को नुकसान पहुंचाता है
- पास करने के लिए पत्थर बहुत बड़ा हो गया है
- दर्द को नियंत्रित नहीं किया जा सकता

4. यूरेटेरोस्कोपी:

जब एक पत्थर मूत्रवाहिनी या मूत्राशय में फंस जाता है, तो आपका डॉक्टर एक उपकरण का उपयोग कर सकता है जिसे यूरेरोस्कोप कहा जाता है। संलग्न कैमरे के साथ एक छोटा तार मूत्रमार्ग में डाला जाता है, और मूत्राशय में जाता है। एक छोटा पिंजरा पत्थर पकड़ने और इसे हटाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
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Monday, 11 September 2017

यदि आप लिंग की लम्बाई बढ़ाना चाहते है या आपके छोटे लिंग होने के कारण आपका साथी असंतुष्ट है तब हाशमी दवाखाना ने इसके लिए एक समाधान किया है. लंबे समय के बाद हर्बल दवा में शोध वे एक सूत्र विकसित किया है – सिकंदर-ए-आज़म प्लस हर्बल कैप्सूल. दुनिया भर के सभी लोग इसे प्रयोग कर रहे हैं और संतुष्ट सेक्स जीवन व्यतीत कर रहे हैं . आप इस हर्बल कैप्सूल लेने के बाद की कल्पना कर सकते हैं कि कैसे आप अपने लिंग की लंबाई और परिधि में बड़ा बदलाव करेंगे

जब लिंग वृद्धि के बारे में बात करते हैं, तब एक नाम सिकंदर-ए-आज़म प्लस है जोकि हमेशा मस्तिष्क में आता है. हमें अपने उत्पाद में मजबूती से इतना विश्वास है की हम आप की संतुष्टि के लिए हमारे प्रतियोगियों के बीच आपके लिंग में वृद्धि कर सकने की गारंटी देते हैं, लाखों पुरुषों ने सफलतापूर्वक बड़ा, मजबूत erections हासिल किया है और एक बेहतर सेक्स जीवन वियातीत कर रहे है.

अपने छोटे लिंग को कैसे बड़ा करे ?

सर्वश्रेष्ठ तरीका सिकंदर-ए-आज़म प्लस हर्बल कैप्सूल है
हमारे मिशन पुरुषों के लिए लिंग की इष्टतम स्वास्थ्य की पेशकश है. ऐसा करके, हम उनके आत्म सम्मान, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता एवं प्रदर्शन को अधिक बेहतर बनाते हैं जब आप सिकंदर-ए-आज़म प्लस उपयोग करेंगे तब आप की समझ में आ जायेगा की क्यों यह सबसे अच्छा उत्पाद है? इसके अतिरिक्त सिकंदर-ए-आज़म प्लस सुरक्षित, अपने यौन स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए सबसे प्रभावी और बिना किसी सहप्रभाव के साबित हुआ है. परंपरागत रूप से, चिकित्सा समुदाय आक्रामक नुस्खे या आक्रामक सर्जरी के साथ समस्याओं का जवाब देने के द्वारा एक प्रतिक्रियावादी दृष्टिकोण शिथिलता को ले लिया है. दुर्भाग्य से, इन तरीकों से अक्सर अवांछित और भी खतरनाक दुष्प्रभाव सामने आये हैं.

सिकंदर-ए-आज़म प्लस कैप्सूल

सिकंदर-ए-आज़म प्लस कैप्सूल स्वाभाविक रूप से लिंग का आकार बढ़ता है और पुरुष लिंग के प्रदर्शन को बढ़ाने मैं काम आता है
उत्तेजित अवस्था में शिश्न की लम्बाई ओर मोटाई बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि उत्थान केन्द्र कितना सशक्त है। जैसे ही मस्तिष्क में काम जाग्रत होता है वैसे ही वह उत्थान केन्द्र को लिंग के स्पंजी टिशू में रक्त भेजने का आदेश भेजता है। यदि उत्थान केन्द्र सशक्त है तो वह उसी अनुपात में उतना ही अधिक रक्त लिंग में एकत्रित करने में समर्थ होता है जिसके फलस्वरूप लिंग का आकार उसी अनुपात में बड़ा हो जाता है। अगर उत्थान केन्द्र दुर्बल हो चुका है तो लिंग की लम्बाई, चैड़ाई अपेक्षाकृत कम होती है।
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नपुंसकता की ओर बढ़ रहे युवकों में जहां काम केन्द्र दुर्बल पड़ जाते हैं वहां उत्थान केन्द्र विशेष रूप से प्रभावित होता है और दुर्बल उत्थान केन्द्र पर्याप्त मात्रा में लिंग में रक्त एकत्रित करने में असमर्थ होने के कारण लिंग का आकार प्राकृत रूप में नहीं आ पाता है। जैसे-जैसे उत्थान केन्द्र की दुर्बलता बढ़ती जाती है वैसे-वैसे लिंग की लम्बाई और चौड़ई कम होती जाती है। उत्तेजित लिंग के सामान्य से कम आकार को देखकर निष्कर्ष निकालना चाहिए कि उत्थान केन्द्र निर्बल हो चुका है। यदि यह दुर्बलता बढ़ती रहती है तो एक अवस्था ऐसी आती है जब उत्थान केन्द्र में बिल्कुल रक्त नहीं भर पाता और परिणामस्वरूप लिंग में उत्थान नहीं होता। इसको ही पूर्ण नपुंसकता कहते हैं। ऐसी अवस्था में सिकंदर-ए-आज़म प्लस का प्रयोग करने से उत्थान केन्द्र को मज़बूत करता है तथा लिंग के बड़े प्रकोष्ट (कार्पस केवेरनोसम) में रक्त इकट्टा होने लगता है तथा इस क्रीम के प्रयोग से स्पंजी उतक को मजबूती प्राप्त होती है जिससे यह नसों पर दाब बना कर रक्त को वापस बाहर नहीं जाने देता तथा लिंग का आकर को बड़ा तथा खड़ा रखता है!
सिकंदर-ए-आज़म प्लस से आप अपना लिंग विस्तार तो कर ही सकते है साथ ही साथ अपना सम्भोग समय भी 30 से 35 मिनट बढ़ा सकते है। सिकंदर-ए-आज़म लिंग वर्धक की सबसे अचूक व अनोखी औषधि है उम्र की अधिकता के कारण या स्वास्थ्य नवयुवक शौकीन लोग भी सिकंदर-ए-आज़म प्लस का सेवन करके अपनी मर्दाना ताकत कई गुना बढ़ा सकते है। मधुमेह के रोगी भी काम शक्ति कोर्ष का सेवन कर कमजोरी दूर कर सकते है।

लिंग छोटा,पतला व टेड़ा होने के कारण

हमारा लिंग सामान्यता तीन प्रकोष्ठ (चैंबर) में बटा होता है जिनमे दो भाग कोपर्स केवेरनोसम (Corpus Cavernosum) व एक कोपर्स स्पोंजीयोसम (Corpus Spongiosum)जिनमे इसमें लिंग के उपरी भाग में दो बड़े बड़े प्रकोष्ठ होते हैं ये दोनों प्रकोष्ठ मिलकर कोपर्स केवेरनोसम के इरेक्टाइल टिशु का गठन करता है जोकि लिंग के उत्थान में सहायता करता है . यदि व्यक्ति हस्तमैथुन करता है तब हाथ की रगढ़ व दबाव से कोपर्स केवेरनोसम शतिग्रस्त हो जाते हैं जिससे लिंग के बड़े प्रकोष्ट (कार्पस केवेरनोसम) में रक्त इकट्टा नही हो पता जिससे लिंग में उत्तेजना आनी बंद हो जाती है और लिंग की वृद्धि भी रुक जाती है दूसरी तरफ यदि कार्पस केवेरनोसम में एक तरफ रक्त का प्रवाह अधिक होता है और दूसरी तरफ कम होता है तब लिंग में टेढ़ेपन की समस्या हो जाती है

सिकंदर-ए-आज़म प्लस कैप्सूल

यह शिकायत होना आजकल आम बात हो गई है। गलत आचार-विचार इसका प्रमुख कारण है। इस समस्या को दूर करने के लिए सिकंदर-ए-आज़म प्लस कैप्सूल बहुत अधिक प्रभावशाली है यह एक हर्बल कैप्सूल है जो लिंग आकार और कामेच्छा बढ़ाता है. यह अनूठा लिंग वृद्धि कैप्सूल समय से पहले थकना या पतन हो जाना आदि समस्याओं को भी दूर करता है. यदि आप जब प्यार करने से शर्मिंदा हो रहे हैं, वहाँ केवल एक ही विकल्प है यानी सिकंदर-ए-आज़म प्लस कैप्सूल
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यह प्राकृतिक रूप से लिंग की वृधि के लिए भी काम करता है दैनिक रूप से एक कैप्सूल, नयी उमंग नया जोश पैदा करता है साथ ही पुरुषों में नपुंसकता की सारी समस्याओं को दूर करता है. सिकंदर आजम कैप्सूल, सिर्फ एक बार एक दिन में सेवन करने से यह लिंग में रक्त प्रवाह को तीर्व कर देता है और कार्पस केवेरनोसम नामक उतक में रक्त इकट्टा होकर लिंग का आकर बढ़ा देता है. सिकंदर-ए-आज़म प्लस हर्बल कैप्सूल फार्मूले की मदद से आप पहले से कहीं ज्यादा बेहतर सेक्स करने में सफल होंगे. अब तक दुनिया भर के लाखों पुरुषों को प्राकृतिक रूप से लाभ पहुंचा चूका है.
सिकंदर-ए-आज़म प्लस (महीने से अधिक) के लगातार उपयोग पुरुष बांझपन के मामलों में मदद करता है, सिकंदर आजम की कार्रवाई स्थायी है. यह भी दीर्घकालिक लाभ है. सिकंदर-ए-आज़म प्लस मधुमेह के रोगियों के लिए प्रभावी है. सिकंदर-ए-आज़म प्लस शक्तिशाली पोषक तत्वों और शक्तिशाली जड़ी बूटी का मिश्रण है. वह लिंग का आकार बढ़ाने के लिए और यौन प्रदर्शन को बढ़ावा देने के साथ विकसित की है. सिकंदर-ए-आज़म प्लस को लिंग बढ़ाने के लिए और लिंग के लिए रक्त का प्रवाह बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया थाए निर्माण के दौरान और लिंग का आकार दृढ़ता बढ़ रही है. सिकंदर-ए-आज़म प्लस एक जड़ी बूटियों है जो लंबी अवधि के प्रभाव के लिए लिया जाना जाता है!
यह प्राकृतिक रूप से लिंग की वृधि के लिए भी काम करता है दैनिक रूप से एक कैप्सूल, नयी उमंग नया जोश पैदा करता है साथ ही पुरुषों में नपुंसकता की सारी समस्याओं को दूर करता है. सिकंदर-ए-आज़म प्लस कैप्सूल, सिर्फ एक बार एक दिन में सेवन करने से यह लिंग में रक्त प्रवाह को तीर्व कर देता है और कार्पस केवेरनोसम नामक उतक में रक्त इकट्टा होकर लिंग का आकर बढ़ा देता है. सिकंदर-ए-आज़म प्लस हर्बल कैप्सूल फार्मूले की मदद से आप पहले से कहीं ज्यादा बेहतर सेक्स करने में सफल होंगे. अब तक दुनिया भर के लाखों पुरुषों को प्राकृतिक रूप से लाभ पहुंचा चूका है.
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सिकंदर-ए-आज़म प्लस एक 100% हर्बल जड़ी बूटी युक्त एक कैप्सूल के रूप में दवाई है जोकि सेक्स करते समय व्यक्ति के शरीर में होने वाली कमजोरी, लिंग में तनाव की कमी, शरीर में दर्द, आदि शिकायतों से राहत प्रदान करने में मदद करता है
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ऊपर लिखी सारी बातें आपको सस्ते साहित्य में मिल जायेंगी और उनका समाधान करने वालो के विज्ञापन भी। सेक्स समस्या के बारे में सही जानकारी हो तो आप किशोरावस्था में आने वाले तूफानों का भी आनंद ले सकेंगे और तनाव मुक्त रह सकेंगे लेकिन जानकारी ग़लत हो तो भटकाव निश्चित है। फूटपाथ पर बिकने वाले सस्ते साहित्य से बचे। फिल्मे देखकर किसी कास्सिनोवा (Casanova) या सुपरमैन (Superman) की भ्रान्ति न पाले। यदि किसी तरह की लिंग व् सेक्स सम्बन्धी शंका या समस्या है तो हमसे मिले। यदि किसी तरह का डर, ग्लानी, या विवाह के पश्चात आने वाली किसी समस्या का डर है तो तुंरत हमसे संपर्क करे।
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Saturday, 9 September 2017

बढे स्तन कम करने के उपाय – एक महिला की सुन्दरता को बढ़ाने के लिए उसके स्तन सबसे ज्यादा अहम भूमिका निभाते है. इसलिए उनका ज्यादा बड़ा होना बहुत जरूरी है, लेकिन ज्यादा छोटे होना या आकार में ना होना ये भी महिला को थोड़ा सा बुरा साबित हो सकता है क्योंकि महिलाओं पर किसी भी व्यक्ति की नज़र जाती है तो वो उसके शरीर की बनाबट को देखता है और इसीलिए यदि महिला के स्तन सुंदर पोस्ट और सही आकार के होना जरूरी है ताकि वह महिला के सौंदर्य को और भी खूबसूरत बनाएं लेकिन कुछ स्त्रियां अपने स्तनों को बढ़ाना चाहती हैं. बड़े स्तन को कम करने के उपाय बहुत ही आसान है.

लेकिन कुछ स्त्रियां ऐसी भी हैं जो कि अपने स्तनों के बढ़े हुए आकार से बहुत ही ज्यादा परेशान होती हैं क्योंकि ज्यादा बड़े स्तन महिला को के लिए नुकसानदायक होते हैं यदि किसी के ज्यादा ही बड़े स्तन है तो कमर दर्द गर्दन के दर्द सांस लेने में दिक्कत थकान आदि जैसी कई समस्याएं हो जाती हैं लेकिन यदि आप अपने स्तनों के आकार को छोटा करना चाहती हैं या उन्हें सही आकार मिलाना चाहती हैं तो आप कुछ उपाय कर सकते हैं बड़े स्तन को कम करने के उपाय बहुत ही आसान है.

बड़े स्तन को कम करने के उपाय –

बड़े स्तन कम करने के उपाय निम्नलिखित हैं जिन्हें आप आसानी से घर पर भी कर सकती हैं बड़े स्तन कम करने के उपाय मैं आप सबसे पहले अदरक का उपयोग कर सकती हैं क्योंकि अदरक शरीर की चर्बी को कम करने में बहुत ही ज्यादा मददगार होता है और इसीलिए कई सारी दवाओं में अदरक का उपयोग किया जाता है यह शरीर के मेटाबोलिक लेवल को कम करके बढ़े हुए स्तन के आकार को भी कम कर देता है.

इसके अलावा स्तनों में जो मांस बनाने वाली कोशिकाएं होती हैं उन्हें धीरे-धीरे खत्म कर देता है जिससे स्तन का साइज एकदम सही हो जाता है अदरक का इस्तेमाल आप इस तरह कर सकती हैं अदरक के छोटे छोटे टुकडे लें और उन्हें पीस लें और इन्हें एक कप पानी में डालकर उबाल लें और जब यह उबल जाए तो है नहीं शहद के साथ मिलाकर पिए ऐसा करने से आपको काफी लाभ होगा और आपके स्तन का आकार भी सही हो जाएगा.

और यदि आप मछली को ठंडे पानी में भिगोकर इसका बाद में सेवन करते हैं तो आपको लाभ होगा यदि आप वेजिटेरियन हैं तो आप मछली के तेल की जगह अधिक से अधिक हरी सब्जियों का सेवन भी कर सकती है जैसे कि पालक गाजर मूली आदि क्योंकि यह शरीर में नमक और चीनी की मात्रा को कम करते हैं और जैसे आपके स्तनों का आकार एकदम सही और समान हो जाएगा और आपके स्तन आकर्षक लगने लगेंगे.



Sunday, 3 September 2017

डायबिटीज जिसे  मधुमेह  भी  कहा जाता  है एक गंभीर बीमारी है जिसे धीमी मौत (साइलेंट किलर ) भी कहा जाता है।
 संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है विशेष रूप से भारत में। इस  बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है  तथा रक्त की कोशिकाएं इस शर्करा को उपयोग  नहीं कर पाती। यदि यह ग्लूकोज  का बढ़ा हुआ लेवल खून में लगातार बना रहे तो शरीर के अंग प्रत्यंगों को नुकसान  पहुँचाना शुरू कर देता  है।

डायबिटीज के कारण (Causes  of Diabetes )-
खान पान एवं लाइफ स्टाइल की गलत आदतें जैसे मधुर एवं भारी भोजन का अधिक सेवन करना, चाय, दूध  आदि में  चीनी का ज्यादा सेवन, कोल्ड ड्रिंक्स एवं अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स अधिक पीना, शारीरिक  परिश्रम ना करना, मोटापा, तनाव, धूम्रपान, तम्बाकू, आनुवंशिकता आदि डायबिटीज के प्रमुख कारण हैं ।

डायबिटीज के लक्षण (Diabetes Symptoms)-

बार बार  पेशाब लगना, प्यास  ज्यादा  लगना, भूख  ज्यादा  लगना, बिना काम करे भी थकान  होना, शरीर में कहीं  घाव होने पर जल्दी ठीक ना होना तथा  त्वचा का बार बार इन्फेक्शन होना। ये सब डायबिटीज के लक्षण  हैं।
यदि इनमे से कुछ  लक्षण यदि  लगातार दिखाई दें तो  खून में शुगर की जाँच अवश्य करवानी चाहिए यह जाँच  बहुत सामान्य और सस्ती होती है जो छोटी छोटी लैब्स में आसानी से हो जाती हैं इसके लिए शुगर का शक होने पर दिन में किसी भी समय (ब्लड शुगर- रैंडम) जाँच करवाई जा सकती है या बार -बार जरुरत पड़े तो जाँच करने की मशीन  घर  पर लायी जा सकती है जो ज्यादा महँगी नहीं होती।

डायबिटीज रोग के उपद्रव  (Complications of Diabetes) –

यदि मधुमेह  रोग का समय पर पता ना चले या पता चलने पर भी खान पान तथा जीवन शैली में लगातार लापरवाही  की जाये और समुचित चिकित्सा ना की जाये तो  खून में सामान्य से अधिक बढ़ा हुआ शुगर का लेवल शरीर के अनेक  अंगों जैसे गुर्दे (Kidney), ह्रदय (Heart), धमनियां (Arteries) आँखें (Eyes) त्वचा (Skin) तथा  नाड़ी  तंत्र (Nervous System) को नुकसान  पहुँचाना शुरू  कर   देता  है और जब तक रोगी संभलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती  है।

 डायबिटीज की चिकित्सा- 

1. ख़ान पान  में  सुधार  करें-चीनी (sugar) एवं  अन्य मीठे पदार्थो का सेवन कम से कम करें या ना करें, चोकर युक्त  आटा, हरी सब्जियां ज्यादा खाएं, मीठे फलों को छोड़ कर अन्य फल  खाएं, एक बार में ज्यादा खाने की बजाय भोजन  को छोटे छोटे अंतराल  में लें, घी तेल से बनी एवं तली भुनी चीजें जैसे- समोसे, कचौड़ी, पूड़ी, परांठे आदि का सेवन कम  से कम करें, गेहूँ, जौ एवं चने को मिला कर बनाई हुई यानि मिस्सी रोटी शुगर की बीमारी  में बहुत फायदेमंद होती  है।
  1. शारीरिक रूप से सक्रिय रहे –
नित्य व्यायाम करना, योग प्राणायाम का नियमित  अभ्यास करना, सुबह शाम चहल कदमी (Morning Evening walk) करना मधुमेह रोग में शुगर कंट्रोल करने के लिए बहुत लाभदायक  है तथा मोटापा नियंत्रण  में  रहता है जो  की  डायबिटीज  का  महत्वपूर्ण  कारण  है।

3. तनाव (Tension, Anxiety Stress) से  बचें –

मधुमेह रोग में तनाव की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है तनाव से बचने की पूरी  कोशिश करें। स्ट्रेस  या  तनाव  के  कारणों को आपसी बात चीत से हल करें, योगा, प्राणायाम, ध्यान  तथा सुबह शाम घूमने से स्ट्रेस कंट्रोल करने में सहायता मिलती  है।

 4. घरेलु  उपाय ( Home Remedies for Diabetes in Hindi )–

आयुर्वेद की कुछ जड़ी बूटियां मधुमेह रोग में  बहुत उपयोगी हैं इनका सेवन डायबिटीज में बहुत लम्बे  समय से किया  जा रहा है आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में इनकी उपयोगिता सिद्ध कर चुका है।
  • दाना मेथी –
दाना मेथी मधुमेह  में  बहुत उपयोगी है इसके लिए एक या दो चम्मच दाना मेथी को एक गिलास पानी में रात में  भिगो देते है सुबह मेथी को चबा चबा कर खा लेते हैं तथा मेथी के पानी को पी लेते हैं या मेथी का चूर्ण या सब्जी  बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।
  • करेला –
करेला भी डायबिटीज के लिए अति महत्पूर्ण है इसके लिए करेले का जूस अकेले या आंवले के जूस में मिला कर 100-125 Ml  की मात्रा में सुबह शाम भूखे पेट लें साथ ही करेले की सब्जी  बनाकर या चूर्ण के रूप  में  भी सेवन  कर सकते  हैं।
  • जामुन –
जामुन का फल खाने  में जितना स्वादिस्ट और रुचिकारक होता है उतना  ही शुगर की तकलीफ में लाभदायक  होता  है इसके लिए जामुन के सीजन में जामुन के फल खाए जा सकते हैं तथा सीजन ना होने पर जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह शाम भूखे  पेट पानी से ले सकते हैं।
  • विजयसार –
विजयसार को ना केवल आयुर्वेद बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में बहुत उपयोगी  मानता है इसके लिए विजयसार की लकड़ी से बने गिलास में रात में पानी भर कर रख दिया जाता है सुबह भूखे पेट इस पानी को पी लिया जाता है विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन  के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं।

5. औषधियां-
यदि  खून  में  शुगर  की  मात्रा  ज्यादा  बढ़ी  हुई  नहीं  हो  तो उपरोक्त  उपायों से  आराम  अवश्य  मिलता  है किन्तु यदि खून में शुगर लेवल ज्यादा हो तो चिकित्सक की राय अवश्य लेनी चाहिए, इसके  लिए एलोपैथी में  इन्सुलिन के इंजेक्शन तथा मुख से सेवन करने वाली गोलियों आदि  का प्रयोग किया जाता है तथा आयुर्वेद में  बसंत  कुसुमाकर  रस, शिलाजत्वादि वटी, चन्द्र प्रभा वटी, शुद्ध शिलाजीत तथा अन्य अनेक दवाओं  का प्रयोग किया जाता  है ये दवाइयाँ डायबिटीज में बहुत फायदेमंद होती हैं लेकिन इन्हे चिकित्सक की राय से ही सेवन करना चाहिए ।



Saturday, 26 August 2017

पुरुषों में हीन भावना की जो सबसे आम समस्या है वह उनका अपने पेनिस (लिंग) के साइज को लेकर चिंतित रहना। अगर आप भी हैं इस परेशानी से पीड़ित हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है अपनाइए ये टिप्स और नैचरली बढ़ाइए अपने लिंग का साइज…

एक रिसर्च के मुताबिक़, ज्यादा फैट और कैलरी वाले खाने से न सिर्फ दिल की बीमारियों का खरता बढ़ जता है बल्कि पेनिस के छोटे होने का भी खतरा रहता है। ऐक्ससार्इज और शारीरिक मेहनत न करने पर आपके धमनियों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का भी खतरा रहता है, जिससे आपके लिंग में बल्ड सर्कुलेशन कम हो सकता है। इसलिए मोटे और स्वस्थ पेनिस (लिंग) के लिए जंक फूड खाना छोड़ दें।

इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियां खाएं| उन फलों और सब्जियों को ज्यादा इस्तेमाल में लाएं जिनमें ऐंटि-ऑक्सिडेंट ज्यादा हो। यह कंपाउंड धमनियों में मौजूद फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और धमनियों को मजबूत बनाता है। इसलिए ऐंटि-ऑक्सिडेंट से भरपूर फल और सब्जियों के सेवन से आप अपने पेनिस के साइज को बढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा इसके लिए आपको स्मोकिंग छोड़नी पड़ेगी| सिगरेट के छोटे-छोटे कण धमनियों को ब्लॉक कर देते हैं जिससे शरीर के सभी हिस्सों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता और शरीर के ठीक से विकास नहीं हो पाता। यही बात शरीर के दूसरे हिस्से के साथ पेनिस पर भी लागू होती है। इसलिए स्मोकिंग करना बंद कर दें।

सिर्फ मजबूत मसल्स और वेट कम करने के लिए ही जिम जाने की वजह नहीं होती। अगर आप अपने पेनिस (लिंग) का साइज बढ़ाना चाहते हैं तो जिम जाइए, जिससे धमनियां का रास्ता साफ हो और बल्ड सर्कुलेशन भी ठीक ढंग से हो। ज्यादा भारीभरकम पेट से पेनिस (लिंग) छोटा लगने लगता है। भले ही पेनिस (लिंग) बड़ा भी है लेकिन आपके भारीभरकम पेट के सामने वह छोटा ही नजर आएगा। इसलिए पेट के फैट को कम करिए।

Thursday, 24 August 2017

स्खलन का अर्थ है लिंग के माध्यम से शरीर से वीर्य का स्राव होना। शीघ्र स्खलन या शीघ्रपतन (प्रिमेच्यूर ईजॅक्युलेशन या पीई) वह स्थिति है जिसमें किसी पुरुष का सेक्स के दौरान उसके साथी की तुलना में शीघ्र ही स्खलन हो जाता हैI कभी-कभी शीघ्र स्खलन को तेजी से स्खलन, समय से पहले चरमोत्कर्ष या जल्दी स्खलन के रूप में भी जाना जाता है।
सामान्यतः पीई चिंता का कारण नहीं है। लेकिन अगर यह सेक्स को कम आनंददायक बनाता है और आपके साथी के साथ रिश्तों पर प्रभाव डालता है तो यह निराशाजनक हो सकता है। ऐसा अक्सर होता है और समस्याएं बढ़ती जाती हैं क्योंकि आपके साथी की सेक्स संतुष्टि एक स्वस्थ और खुशनुमा जीवन के लिए आवश्यक हैं।
30% से अधिक पुरुष कभी न कभी समय से पहले स्खलन से पीड़ित हुए है। यह व्यक्ति के आत्मसम्मान को प्रभावित करता है और पार्टनर को असंतुष्ट छोड़ देता है। इस समस्या को अक्सर मनोवैज्ञानिक माना जाता है, लेकिन कुछ बायोलॉजिकल कारक भी हो सकते है।
स्खलन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जब पुरुष यौन उत्तेजित होते हैं, तो संकेत आपके रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क में भेजे जाते हैं। जब पुरुष उत्तेजना के एक निश्चित स्तर तक पहुँचते हैं, तब संकेत आपके दिमाग से आपके प्रजनन अंगों को भेजे जाते हैं। इससे लिंग (स्खलन) के माध्यम से वीर्य स्राव किया जा सकता है।

    शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के प्रकार - Types of Premature Ejaculation in Hindi

    1. लाइफलांग (प्राथमिक) शीघ्र स्खलन:- इस प्रकार का शीघ्र स्खलन आपके जीवन के पहले यौनिक संपर्क से लेकर जीवनभर या लगभग हमेशा होता है।
    2. अर्जित (माध्यमिक) शीघ्र स्खलन:- आपको बिना किसी समस्या के पूर्व यौन अनुभव के बाद अगर शीघ्र स्खलन की समस्या होती है तो उसे अर्जित या अक्वायर्ड शीघ्र स्खलन कहते हैं।

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के लक्षण - Premature Ejaculation Symptoms in Hindi

 

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शीघ्र स्खलन के निम्नलिखित प्रमुख लक्षण हैं:-
  1. एक तेज उत्तेजना, स्तंभन और स्खलन प्रक्रिया।
  2. स्खलन आमतौर पर उत्तेजना के कुछ सेकंड या मिनट के भीतर हो जाता है।
हालांकि, सभी यौन स्थितियों में शीघ्र स्खलन की समस्या हो सकती है, हस्तमैथुन के दौरान भी। बहुत से पुरुषों का मानना ​​है कि उनको समयपूर्व स्खलन के लक्षण हैं, लेकिन वे लक्षण समयपूर्व स्खलन के लिए निर्धारित ​​मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। इसके बजाय इन पुरुषों को प्राकृतिक परिवर्तन वाला समयपूर्व स्खलन हो सकता है, जिसमें तीव्र स्खलन के साथ-साथ सामान्य स्खलन की अवधि भी शामिल है। (और पढ़ें - यौनशक्ति कम होने के कारण)

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के कारण - Premature Ejaculation Causes in Hindi

 

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समय से पहले स्खलन का सही कारण ज्ञात नहीं है। हालांकि यह पहले केवल मनोवैज्ञानिक माना जाता था, पर अब डॉक्टरों को पता है कि समय से पहले स्खलन में मनोवैज्ञानिक और जैविक कारकों का जटिल संपर्क शामिल है।
मनोवैज्ञानिक कारण
  1. प्रारंभिक यौन अनुभव।
  2. यौन शोषण।
  3. अपने शरीर के रूप के प्रति नाकारात्मक छवि।
  4. डिप्रेशन
  5. समय से पहले स्खलन के बारे में चिंता करना।
  6. दोषी होने की भावनाएं जो यौन संपर्क के माध्यम से भागने की आपकी प्रवृत्ति को बढ़ाती हैं।
  7. जिन पुरुषों को स्तंभन दोष हैं, उनमें जल्दी स्खलन हो सकता हैं, जो कि बदलना मुश्किल हो सकता है। चूंकि स्खलन के बाद उत्तेजना दूर हो जाती है इसलिए यह जानना मुश्किल हो सकता है कि समस्या पीई है या स्तंभन दोष (ईडी)। ईडी का पहले इलाज किया जाना चाहिए। एक बार ईडी का इलाज होने के बाद शीघ्र स्खलन समस्या नहीं रहेगा।
  8. शीघ्र स्खलन का कारण कई लोगो में चिंता की समस्याएं भी हो सकता है, विशेष रूप से यौन प्रदर्शन या अन्य मुद्दों से संबंधित चिंता।
  9. रिश्ते संबंधी समस्याएं भी शीघ्र स्खलन का कारण हो सकती हैं।
बायोलॉजिकल कारण
  1. थायरॉयड ग्रंथि या शरीर में यौन हार्मोन के असामान्य स्तर के साथ हार्मोनल समस्याएं।
  2. मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर के साथ समस्याएं, जिससे मस्तिष्क के आनंद केंद्रों को सही संकेत देने में विफल हो जाते हैं।
  3. आपकी स्खलन प्रणाली के प्रतिवर्त (रिफ्लेक्स) तंत्र के साथ समस्याएं।
  4. मूत्रमार्ग या प्रोस्टेट में संक्रमण।
  5. आनुवंशिकता।
  6. सर्जरी या मानसिक आघात के कारण तंत्रिका या संवेदी प्रणाली में क्षति।

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के बचाव के उपाय - Prevention of Premature Ejaculation in Hindi

 

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  1. शीघ्र स्खलन से बचने के लिए अन्य यौन सुखों पर ध्यान दें। इससे चिंता कम हो सकती है और आपको स्खलन पर बेहतर नियंत्रण प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
  2. स्खलन रिफ्लेक्स (शरीर का एक स्वत: रिफ्लेक्स, जिसके दौरान स्खलन होता है) को रोकने के लिए एक गहरी सांस लें।
  3. अपने साथी के साथ सेक्स करते हुए उसे ऊपर रहने को कहें (जब आप स्खलन के करीब हो तो वो दूर हट सके)।
  4. सेक्स के दौरान रुके और कुछ उबाऊ चीज के बारे में सोचे।

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) का निदान - Diagnosis of Premature Ejaculation in Hindi

आपके यौन जीवन के बारे में पूछने के अलावा, आपका डॉक्टर आपके स्वास्थ्य के इतिहास के बारे में पूछेगा और शारीरिक परिक्षण भी कर सकता है।
यदि आपको समय से पहले स्खलन और उत्तेजना लाने या बनाए रखने दोनों में समस्या है, तो आपका डॉक्टर आपके पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) के स्तर की जांच के लिए रक्त परीक्षण या अन्य परीक्षण कर सकता है।
कुछ मामलों में, आपका चिकित्सक सुझाव दे सकता है कि आप मूत्र रोग विशेषज्ञ या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास जाएँ, जो यौन रोग के विशेषज्ञ भी हो।

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) का उपचार - Premature Ejaculation Treatment in Hindi


1. अपने स्खलन रिफ्लेक्स पर नियंत्रण पाएं
नियमित रूप से (प्रति सप्ताह तीन से पांच बार) संवेदनशीलता और उत्तेजना के स्तर के आदी बनने के लिए स्वयं उत्तेजक (हस्तमैथुन) से शुरू करें। अलग-अलग संवेदनाओं का आदि होने के लिए गीले हाथ और सूखे हाथ दोनों के साथ हस्तमैथुन करने की कोशिश करें।
जब तक आपको वीर्यपात होना महसूस हो, तब तक हस्तमैथुन करते हुए नियंत्रण करने का प्रयास करें, वीर्यपात होने से पहले ही हस्तमैथुन रोक दें, अब उत्तेजना कम हो जाने दे, लगभग पांच मिनट या उससे अधिक और तब फिर से हस्तमैथुन करना शुरू करें। अंततः वीर्यपात होने से पहले तीन या चार बार इस क्रिया का प्रयोग करें।
इस क्रिया का अभ्यास करने से आपको यह जानने में मदद मिलेगी कि आपका "गैर-वापसी का बिंदु" कहां है, ताकि साथी से सेक्स के दौरान जब आपको लगता है कि वीर्यपात होने वाला है, तो आप यौन स्थितियों को बदलने के लिए लिंग बाहर खींच लें। इससे एक पल के लिए वीर्यपात रोक सकते हैं।
दूसरा, आप अपना स्ट्रोक बदल सकते हैं (सेक्स के दौरान अंदर और बाहर के बजाय आप अपने साथी के अंदर अपने लिंग को छोड़ सकते हैं और सर्कल में जा सकते हैं, जो थोड़ा कम उत्तेजक हो सकता है)। स्खलन पर नियंत्रण पाने के लिए आपके 'गैर-वापसी का बिंदु' का क्या अर्थ है, यह जानना महत्वपूर्ण है।

2. पैल्विक फ्लोर मांसपेशी व्यायाम
तीन महीने के नियमित पैल्विक फ्लोर मांसपेशियों के अभ्यास के बाद 55 पुरुषों के ऊपर एक छोटे से अध्ययन में पेनाइल फंक्शन में सुधार देखा गया और छह महीने बाद 40 प्रतिशत पुरुषों ने सामान्य स्तंभन फंक्शन पुनः प्राप्त कर लिया था।
अपने पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को पहचानें। जब पेशाप करते-करते उसे बीच में रोकते हैं तो इसके लिए आपके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मांसपेशियां आपके पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियां हैं। जब आप इन मांसपेशियों को सिकोड़ते हैं तो आपके अंडकोष ऊपर उठ जाते हैं।
अब जब आप जानते हैं कि ये मांसपेशियां कहाँ हैं, उन्हें 5 से 20 सेकंड के लिए सिकोड़े और फिर उन्हें सामान्य रूप में छोड़ दे। इस अभ्यास को एक साथ 10 से 20 बार दोहराएं, दिन में तीन से चार बार आप यह अभ्यास कर सकते हैं।

3. कंडोम का इस्तेमाल करें 
कंडोम का उपयोग करने से स्खलन के समय को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। वे संभोग के दौरान संवेदनशीलता को कम करने का काम करते हैं, इसलिए वे शीघ्र स्खलन की समस्या के लिए सहायक हो सकते हैं। ऐसे ब्रांड के कंडोम का प्रयोग करें जो आकार में थोड़े मोटे (थिक) हो।

4. सेक्स से पहले हस्तमैथुन करें
बहुत से पुरुषों को दूसरी बार उत्तेजना के दौरान कम संवेदनशीलता का अनुभव होता है। अक्सर समय से पहले स्खलन के लिए एक अच्छा इलाज है - एक बार सेक्स से पहले ही वीर्यपात करना (शायद संभोग के दौरान), और फिर उत्तेजना प्राप्त करके अपने साथी को खुश करने के लिए आगे बढ़ें। दूसरी उत्तेजना का उपयोग लंबे समय तक कर सकेंगे।
हालांकि कुछ जोड़ों ने शुरू में इस तरीके के बारे में शिकायत की है, लेकिन इसने बहुत से जोड़ों के लिए बहुत अच्छा काम किया है। (और पढ़ें - महिलाओं और पुरुषों को यौन विकारों से बचना है तो ज़रूर मानें बाबा रामदेव की बात)

5. ड्रग्स और सुन्न करने वाली क्रीम या स्प्रे
पीई यानी शीघ्र स्खलन का इलाज करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में किसी ड्रग्स को मंजूरी नहीं दी गई है। फिर भी, कुछ दवाएं और क्रीम या स्प्रे है। जो पीई से पीड़ित पुरुषों में स्खलन धीमा करने के लिए प्रायोगिक स्तर पर उपयोगी पायें गए हैं।
कृपया ध्यान दें कि निम्न दवाएं केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से बताई गयी है। सख्त हिदायत दी जाती है कि किसी भी दवा को एक अच्छे डॉक्टर की सिफारिश के बिना न लें।
डॉक्टरों ने प्रायोगिक चरण में यह पाया है कि एंटीडिप्रेसेंट के प्रयोग से पुरुषों और महिलाओं में ओर्गास्म प्राप्त करने में देरी होती है। फ्लूक्सैटिन (Fluoxetine), परोक्सेटीन (Paroxetine), सर्ट्रालाइन (Sertraline) और क्लॉमिप्रामाइन (Clomipramine) जैसे ड्रग्स सेरोटोनिन के स्तर को प्रभावित करते हैं। पीई का इलाज करने के लिए डॉक्टरों ने इन दवाओं का इस्तेमाल "ऑफ-लेबल" (दवा के मूल उपयोग से अलग कारण के लिए) करना शुरू कर दिया।
पीई के लिए दवाएं हर दिन या केवल सेक्स से पहले ही ली जा सकती हैं। आपका डॉक्टर आपकी गतिविधि स्तर के आधार पर तय करेगा कि आपको कौनसी दवा लेनी चाहिए। दवा लेने का सबसे अच्छा समय स्पष्ट नहीं है। ज्यादातर डॉक्टर सेक्स से पहले 2 से 6 घंटे का सुझाव देते हैं। यदि आप ये दवाएं लेना बंद कर देते हैं तो पीई वापस आ सकता है। पीई वाले अधिकांश लोगों को एक निरंतर आधार पर इन दवाओं को लेने की जरूरत होती है।
ये क्रीम या स्प्रे लिंग के मुँह पर 20 से 30 मिनट सेक्स से पहले लगाए जाते हैं। यदि आप उपयोग के लिए निर्धारित मात्रा से अधिक समय तक अपने लिंग पर क्रीम या स्प्रे छोड़ते हैं, तो आपकी उत्तेजना समाप्त हो सकती है, इसलिए मात्रा संबंधी निर्देशों का सख्ती से पालन करें। सेक्स से 5 से 10 मिनट पहले अपने लिंग पर लगे क्रीम या स्प्रे को धो लें। इसे सेक्स के दौरान लिंग पर बिलकुल भी लगा न रहने दे, क्योंकि आपके साथी की योनि को नुकसान हो सकता हैं।

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के जोखिम और जटिलताएं - Premature Ejaculation Risks & Complications in Hindi

 

विभिन्न कारक समय से पहले स्खलन के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, इनमें शामिल हैं:
  1. स्तंभन दोष:- यदि आप को कभी-कभी या लगातार उत्तेजना प्राप्त करने या बनाए रखने में परेशानी हो, तो आपको समय से पहले स्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
  2. तनाव:- आपके जीवन के किसी भी क्षेत्र में भावनात्मक या मानसिक तनाव शीघ्र स्खलन में भूमिका निभा सकते हैं। आपकी आराम करने की क्षमता और यौन संपर्क के दौरान ध्यान देने की आपकी क्षमता को सीमित कर सकते हैं।
  3. तनाव और रिश्ते की समस्याएं:- शीघ्रपतन से आपके निजी जीवन में भी समस्याएं हो सकती हैं। शीघ्रपतन की एक आम जटिलता संबंध में तनाव का उत्त्पन होना है।